आज मेरे द्वारा विद्यालय स्तर पर कक्षा 6 के प्रशिक्षण में सीखी गई ज्यामिति से संबंधित गतिविधि का छात्रों के द्वारा अनुकरण किया गया।
इस गतिविधि के द्वारा हम कक्षा 6 के छात्रों में ज्यामिति के प्रति रुचि पैदा करते हैं और साथ ही उन्हें विभिन्न प्रकार के आकार और उनकी आकृतियों की विशेषता के साथ सुगमता से अध्ययन कराया जाता है।
इस दौरान छात्रों ने दिए गए विभिन्न पोस्टरों पर ज्यामितीय की विभिन्न आकृतियों का चित्रण किया तथा उन्हें विभिन्न कलर के माध्यम से अलंकृत किया। उन्हें उन से संबंधित आकृति को उदाहरण के द्वारा दिखाया और समझाया गया।
इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य ज्यामितीय के प्रति छात्रों में रुझान पैदा करना और विभिन्न आकृतियों को दैनिक जीवन से जोड़ना है।
सोमवार, 17 दिसंबर 2018
कक्षा 6 की ज्यामितीय से संबंधित एक्टिविटी का प्रदर्शन
शुक्रवार, 14 दिसंबर 2018
Let's know About Electricity
आज विद्यालय में बच्चों को इलेक्ट्रिसिटी के बारे में बताया गया इस दौरान बच्चों में विधुत के कुछ उपकरणों के नमूनों का प्रयोग द्वारा परीक्षण किया और विद्युत संचार तथा उसके द्वारा होने वाले कई सारे अन्य कार्यों का अवलोकन किया।
इस दौरान छात्रों को प्रत्यावर्ती धारा और उसे उत्पन्न करने के जनित्र की कार्यप्रणाली का एक छोटे से नमूने के द्वारा अध्ययन किया।
इसके अतिरिक्त छात्रों ने कुंजी और परिपथ से संबंधित विभिन्न प्रकार के प्रयोगों और नमूनों का अध्ययन किया।
इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में विद्युत धारा से संबंधित विभिन्न प्रश्नों के निराकरण और तथ्य को रोचक बना कर प्रस्तुत करना रहा।
शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018
Learning by doing
There are some pics for the method of
learning by doing for class 6th topic -
.....a useful technic of teaching-learning process......
गुरुवार, 6 दिसंबर 2018
लेंस की पहचान
आज विद्यालय के बच्चों को लेंस के बारे में पढ़ाया गया
तथा उन्हें खेल-खेल में लेंसो की पहचान करने का तरीका सिखाया गया।
इस विधि में विद्यार्थियों ने मन लगा कर भाग लिया तथा खेलते हुए आंखे बंद करके भी लेंस को पहचान कर दिखाया.........
मंगलवार, 27 नवंबर 2018
Inculcating Deeper Human Values in Teaching and Learning
Inspired by National Cadet Corps (NCC), this innovative activity encourages students to be always ready to help others and recognises their efforts by awarding them different badges/ribbons. The main idea is that students get opportunities to hone their sense of responsibility and empathy, and they willingly start identifying ways to develop leadership and life skills through self-development, challenge, adventure and fun!
Scouts & Guides is all about young children’s all-round development. Their general knowledge improves, and they learn important skills required for better learning in classroom and in life, including sense of Duty, Commitment, Discipline, Leadership and Teamwork. Their confidence and self-esteem also improves significantly. This activity is most suitable for upper primary class, and can also be integrated with syllabus topics.
Teachers spend 10-15 minutes talking to students about the importance of helping others. In this discussion, the difference between sympathy and empathy can also be mentioned. Sympathy means you merely pity someone’s misfortune. Whereas empathy means that you understand the feelings of another and take some action to comfort this person. Then, discuss with students how they can lend a helping hand to their classmates, family members, neighbours, pets and stray animals. For this, they do not have to take any risky work. Sometimes simple and intuitive tasks can be a big support to others.
1. Introduce Scouts & Guides to your class as a game of collecting badges/ribbons of all the colours within one academic year, by helping others in their school, home or community. Provide examples, like helping parents with household work (cleaning, feeding animals, feeding siblings etc.). The second example is teaching classmates, younger siblings or neighbourhood students. Another one is of helping the elderly persons cross the road, or fetch water, or visit the market.
2. Scouts & Guides can also be integrated with subject topics taught in the classroom. For example, if students have read about mosquito-borne diseases or about cleanliness, then the teacher can ask them to help their neighbours ensure there is no stagnant water in their homes, bathrooms drainage is not blocked, kitchen is clean, etc.
3. Students must write a description of the helping work done in their Scouts & Guides notebook.
4. At the end of every week (or month), the teacher reviews students’ notebooks and presents them the respective colour badges/ribbons based on the type of help provided by them. (If the teacher is not sure whether a student has written the truth or not, he/she may ask follow up questions and assess the student’s sincerity.)
5. At the end of the academic year, students who have managed to collect badges/ribbons of all the colours are applauded and recognised in the class.
6. At year-end/annual day celebrations, the teacher may also invite various persons helped by the students, so they can share their experience and further encourage children to continue the good work.
This activity improves teacher-student trust and bonding, and also creates a cordial, supportive learning environment as classmates get to understand each other’s goodness. Values of gratitude and humility can be especially encouraged through this activity, along with curiosity and urge to understand things better.
The teacher will need to create and hang a postbox in the classroom. You may decorate an empty cardboard box with colourful paper and write 'My Postbox, My Voice' on it. Students may also participate in decoration work.
Discuss with students that to stay on the path of righteousness as we grow up, it is important to keep asking questions and seek answers, so the right people can guide us at the right time. Also, many times, it is not easy to practice good behaviour. Even simple values-based tasks, like saying ‘thank you’ and ‘sorry’, can be a challenge if we are influenced by ego, hierarchy and social status. Overcoming these hesitations, and finding a way to express our thoughts is important. After this, encourage them towards character building by taking the following steps on a regular basis:
- After reading a chapter on India’s Independence Movement, a student posted a letter asking why it was considered okay for Indian freedom fighters to throw bombs, but not okay for British soldiers to arrest them when actually it was the law? - When a student’s sister got married, she was given dowry. The student posted an anonymous letter expressing strong opinion against the dowry system, which he could not speak among his family members being the youngest person. - Two friends had a misunderstanding and stopped talking to each other. After many months, when one of them could not bear the loneliness, she posted an anonymous letter to her angered friend, with just one line saying ‘Sorry I did not like that every day you expected me to follow your orders.’
By Sri Aurobindo Society Rupantar
मंगलवार, 20 नवंबर 2018
One more step in support of the unique begging by the government effort...
आज दिनांक 20/10/2018 को पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिपरापुरूषोतम परिसर में बच्चो को सरकार द्वारा दी जाने वाली शीत ऋतु की विशेष सौगात जो कि नि:शुल्क स्वेटर वितरण (सत्र 2018-19) है,
कार्यक्रम का संचालन समस्त अध्यापकों के सहयोग से सकुशल और प्रभावी तरीके से किया गया।
इस महत्वपूर्ण समय में बच्चो के चेहरों पर मुस्कान मन को बहुत ही आनंदमय लग रही थी।
सभी के बीच खुशियों के कुछ मनमोहक दृश्य अवर्णनीय हैं
........... अखिल
सोमवार, 19 नवंबर 2018
शनिवार, 17 नवंबर 2018
Saturday ....the game day....
विद्यालय परिसर में बच्चो के बीच वॉलीबॉल खेल को बढ़ावा देना का प्रयास किया गया तथा उन्हें खेल के कुछ दाओं पेंच बताए गए।
बच्चो ने भी खूब जमकर खेल का मजा लिया और आगे भी इसी प्रकार कार्यक्रम को जारी रखने को कहा। इस महत्वपूर्ण पल के कुछ मनमोहक दृश्य आप सभी के साथ शेयर कर रहा हूं।
आप का आपना एक साथी ----अखिल
मंगलवार, 13 नवंबर 2018
HAPPY CHILDREN'S DAY
जवाहरलाल नेहरू
जन्म: 14 नवंबर, 1889
निधन: 27 मई, 1964
उपलब्धियां:-
असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया, 1924 में इलाहाबाद के नगर निगम के अध्यक्ष चुने गए और शहर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में सेवा की, 1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता की और आजादी की मांग का प्रस्ताव पारित किया, 1936, 1937 और 1946 में कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए, स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने, गुट निरपेक्ष आंदोलन के मुख्य शिल्पकारों में से एक
पंडित जवाहरलाल नेहरू स्वंत्रता आन्दोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले नेताओं में से एक थे। वह आजादी के बाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने। जवाहर लाल नेहरू को आधुनिक भारत के निर्माता के रूप में देखा जाना जाता है। वह बच्चों से अत्यधिक प्रेम करते थे और बच्चे उन्हें प्यार से चाचा नेहरू बुलाया जाता था।
प्रारंभिक जीवन:-
जवाहर लाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को हुआ था। उनके पिता मोतीलाल नेहरू इलाहाबाद के एक विख्यात वकील थे। जवाहरलाल नेहरू की माता का नाम स्वरुप रानी था। जवाहरलाल नेहरू मोतीलाल नेहरू की इकलौते पुत्र थे। जवाहरलाल नेहरू के अलावा मोतीलाल नेहरू की तीन पुत्रियां भी थीं। नेहरू कश्मीरी वंश के सारस्वत ब्राह्मण थे।
जवाहर लाल नेहरू ने दुनिया के कुछ सबसे अच्छे स्कूलों और विश्वविद्यालयों से शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अपनी पढाई हैरो से की और कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज से लॉ की डिग्री पूरी की। इंग्लैंड में उन्होंने सात साल व्यतीत किए जिससे वहां के फैबियन समाजवाद और आयरिश राष्ट्रवाद के लिए एक तर्कसंगत दृष्टिकोण विकसित हुआ।
कैरियर :-
जवाहरलाल नेहरू 1912 में भारत लौट आये और वकालत की शुरूआत की। 1916 में कमला नेहरू से उनका विवाह हुआ। 1917 में जवाहर लाल नेहरू होम रूल लीग में शामिल हो गए। राजनीति में उनकी असली दीक्षा दो साल बाद 1919 में हुई जब वे महात्मा गांधी के संपर्क में आए। उस समय महात्मा गांधी ने रॉलेट अधिनियम के खिलाफ एक अभियान शुरू किया था। नेहरू, महात्मा गांधी के सक्रिय लेकिन शांतिपूर्ण, सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रति खासे आकर्षित हुए। गांधीजी ने स्वयं युवा जवाहरलाल नेहरू में आशा की एक किरण और भारत का भविष्य देखा।
नेहरू परिवार ने महात्मा गांधी द्वारा दी गयीं दीक्षाओं के हिसाब से अपने आप को ढाल लिया। जवाहरलाल और मोतीलाल नेहरू ने पश्चिमी कपडों और महंगी संपत्ति का त्याग कर दिया। वे अब एक खादी कुर्ता और गाँधी टोपी पहनने लगे। जवाहर लाल नेहरू ने 1920-1922 में असहयोग आंदोलन में सक्रिय हिस्सा लिया और इस दौरान पहली बार गिरफ्तार किए गए। कुछ महीनों के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
जवाहरलाल नेहरू 1924 में इलाहाबाद नगर निगम के अध्यक्ष चुने गए और उन्होंने शहर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में दो वर्ष तक सेवा की। यह बाद में उनके लिए एक मूल्यवान प्रशासनिक अनुभव साबित हुआ जब वो देश के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने अपने कार्यकाल का इस्तेमाल सार्वजनिक शिक्षा, स्वास्थय सेवा और साफ-सफाई के विस्तार के लिए किया। 1926 में उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों की ओर से सहयोग न मिलने के कारण इस्तीफा दे दिया ।
1926 से 1928 तक, जवाहर लाल ने अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव के रूप में सेवा की ।1928-29 में कांग्रेस के वार्षिक सत्र का आयोजन मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में किया गया। उस सत्र में जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चन्द्र बोस ने पूरी राजनीतिक स्वतंत्रता की मांग का समर्थन किया जबकि मोतीलाल नेहरू और अन्य नेता ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर ही प्रभुत्व सम्पन्न राज्य चाहते थे। इस मुद्दे के हल के लिए, गांधी ने बीच का रास्ता निकाला और कहा कि ब्रिटेन को भारत के राज्य का दर्जा देने के लिए दो साल का समय दिया जाएगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो कांग्रेस पूर्ण राजनैतिक स्वतंत्रता के लिए एक राष्ट्रीय आंदोलन शुरू करेगी। नेहरू और बोस ने मांग की कि इस समय को कम कर के एक साल कर दिया जाए। ब्रिटिश सरकार ने इसका कोई जवाब नहीं दिया।
दिसम्बर 1929 में, कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन लाहौर में आयोजित किया गया जिसमें जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष चुने गए। इसी सत्र के दौरान एक प्रस्ताव भी पारित किया गया जिसमंे ‘पूर्ण स्वराज्य’ की मांग की गई और 26 जनवरी 1930 को लाहौर में जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत का झंडा फहराया। गांधी जी ने भी 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन का आह्वान किया। आंदोलन काफी सफल रहा और इसने ब्रिटिश सरकार को प्रमुख राजनैतिक सुधारों की आवश्यकता को स्वीकार करने के लिए मजबूर कर दिया ।
जब ब्रिटिश सरकार ने 1935 का अधिनियम प्रख्यापित किया तब कांग्रेस पार्टी ने चुनाव लड़ने का फैसला किया। नेहरू चुनाव के बाहर रहे लेकिन ज़ोर-शोर से पार्टी के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया। कांग्रेस ने लगभग हर प्रांत में सरकारों का गठन किया और केन्द्रीय असेंबली में सबसे ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की। नेहरू कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए 1936, 1937 और 1946 में चुने गए थे और राष्ट्रवादी आंदोलन में गांधी जी के बाद दूसरे नंबर के नेता बन गए। उन्हें 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गिरफ्तार भी किया गया और 1945 में छोड दिया गया। 1947 में भारत और पाकिस्तान के विभाजन और आजादी के मुद्दे पर अंग्रेजी सरकार के साथ हुई वार्ताओं में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1947 में वह स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने। पाकिस्तान के साथ नई सीमा पर बड़े पैमाने पर पलायन और दंगे, भारतीय संघ में 500 के करीब रियासतों का एकीकरण, नए संविधान का निर्माण, संसदीय लोकतंत्र के लिए राजनैतिक और प्रशासनिक ढांचे की स्थापना जैसे विकट चुनौतियों का सामना उन्होंने प्रभावी ढंग से किया।
जवाहरलाल नेहरू ने भारत के विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने योजना आयोग का गठन किया, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास को प्रोत्साहित किया और लगातार तीन पंचवर्षीय योजनाओं का शुभारंभ किया। उनकी नीतियों के कारण देश में कृषि और उद्योग का एक नया युग शुरु हुआ। नेहरू ने भारत की विदेश नीति के विकास में प्रमुख भूमिका निभाई। जवाहर लाल नेहरू ने टिटो और नासिर के साथ मिलकर एशिया और अफ्रीका में उपनिवेशवाद के खात्मे के लिए एक गुट निरपेक्ष आंदोलन की रचना की। वह कोरियाई युद्ध का अंत करने, स्वेज नहर विवाद सुलझाने और कांगो समझौते के लिए भारत की सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय पुलिस व्यवस्था की पेशकश को मूर्तरूप देने जैसे अन्य अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के समाधान में मध्यस्थ की भूमिका में रहे। पश्चिम बर्लिन, ऑस्ट्रिया और लाओस जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान के लिए पर्दे के पीछे रह कर भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
नेहरू पाकिस्तान और चीन के साथ भारत के संबंधों में सुधार नहीं कर पाए। पाकिस्तान के साथ एक समझौते तक पहुँचने में कश्मीर मुद्दा और चीन के साथ मित्रता में सीमा विवाद रास्ते के पत्थर साबित हुए। वर्ष 1962 में चीन ने भारत पर आक्रमण कर दिया जिसका पूर्वानुमान करने में नेहरू विफल रहे। यह उनके लिए एक बड़ा झटका था और शायद उनकी मौत भी इसी कारण हुई। 27 मई 1964 को जवाहरलाल नेहरू को दिल का दौरा पड़ा जिसके कारण उनकी मृत्यु हो गई।
शनिवार, 10 नवंबर 2018
National Education Day
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस
-11 नवम्बर-
National Education Day हर वर्ष 11 नवम्बर को भारत में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है. इस दिन मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जी का जन्म दिन भी है. वर्ष 2008 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा अबुल कलाम जयंती को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाने की परम्परा की शुरुआत हुई. मौलाना अबुल कलाम आजाद महान स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद् थे. आजादी के बाद इन्हें स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री भी बनाए गये थे. मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्म 11 नवम्बर 1888 को सऊदी अरब के मक्का शहर में हुआ था.
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 11 नवम्बर 2018
भारत में शिक्षा के प्रचार-प्रचार और शिथिल पड़ी शिक्षा व्यवस्था को पुनर्जीवित करने में मौलाना आजाद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वे 1947 से 1958 तक लगातार शिक्षा मंत्री के पद पर रहते हुए अपने अनुभवो और कार्यकुशलता से हमारी शिक्षा व्यवस्था को सुद्रढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की l
एक राष्ट्रीय नेता होने के साथ साथ आजाद उच्च कोटि के प्रतिभावान कवि और पत्रकार भी थे. जिन्हें 1992 में देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान दिया गया. हालांकि इनकी मृत्यु 1958 में ही हो गई थी. सादा जीवन और उच्च विचार की शैली को अपनाने वाले मौलाना आजाद गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित भारत के सच्चे हितेषी थे. वे हमेशा से भारत पाकिस्तान विभाजन के विरोधी रहे थे.
भारत की शिक्षा प्रणाली को सुद्रढ़ करने में राजा राममोहनराय, स्वामी विवेकानन्द, स्वामी दयानन्द, अरविन्द गांधी, रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे राष्ट्र नेताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा था.
मौलाना अबुल कलाम आजाद की जीवनी
मौलाना आजाद के वंशज अफगान थे उनकी माँ अरबी तथा इनके पिता बाबर के भारत पर आक्रमण के समय आकर बंगाल में बस गये थे. कुछ वर्षो बाद खेरिद्दीन के विद्रोह के चलते इन्होने भारत को छोड़कर मक्का को अपनी शरण स्थली बनाया, यही पर 1888 में मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्म हुआ था. इनका वास्तविक नाम अबुल कलाम ग़ुलाम मुहियुद्दीन था. कलाम के पिताजी पेशे से शिक्षक थे उन्ही से इन्होने फारसी तथा दर्शनशास्त्र, रेखागणित, गणित और बीजगणित का ज्ञान प्राप्त किया.
ये कई वर्षो तक ईराक और तुर्की के क्रांतिकारी नेताओं के साथ रहे. जब वे भारत लौटे तो उनकी मुलाकात अरविन्द घोष श्याम शुन्दर चक्रवर्ती से हुई, इन्ही के आग्रह पर कलाम भारत के स्वाधीनता संग्राम में शामिल हो गये. अबुल कलाम आजाद कुछ ही वर्षो में कांग्रेस के विरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर व्यापक स्वतंत्रता प्राप्ति संग्राम की योजना पर कार्य करने लगे. इस दौरान उन्होंने मुस्लिम युवकों और धार्मिक संगठनो को भी भारत की स्वतंत्रता के इस संग्राम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया.
इन्होने जीवन पर्यन्त हिन्दू मुस्लिम एकता की भावना को सुद्रढ़ करने का कार्य किया. आजाद ने अल हिलाल उर्दू पत्र के जरिये मुस्लिम सम्प्रदाय में देशभक्ति की भावना को प्रबल करने का कार्य किया. अंग्रेज सरकार इस तरह के क्रियाकलापों से खुश नही थी. वो नही चाहते थे कि हिन्दू मुस्लिम कभी एक हो और उनमे एक राष्ट्र की मांग को मजबूती मिले. इसी बात को मद्देजनर रखते हुए अल हिलाल को प्रतिबंधित करने के साथ ही मौलाना अबुल कलाम को भी नजर बंद कर दिया गया. इन्हें 1930 में नमक सत्याग्रह के दौरान गांधीजी का साथ देने के कारण पुनः जेल में बंद कर दिया गया.
शिक्षा के क्षेत्र में मौलाना आज़ाद का योगदान
खुद उर्दू और फारसी के ज्ञाता होने के बावजूद शिक्षा मंत्री के पद पर रहते हुए इन्होने उर्दू की जगह अंग्रेजी को प्रचलन में लाने पर जोर दिया. साथ ही आजादी के बाद अपनाई गई नई शिक्षा प्रणाली में इन्होने शिक्षा और संस्क्रति के मेल पर जोर दिया. इन्ही के प्रयासों की बदौलत संगीत नाटक और ललित कला अकादमी का गठन किया गया. भारत में शिक्षा का अधिकार अब लागू किया गया, मगर मौलाना आजाद उस समय भारत में बिना भेदभाव के सभी वर्गो के बालक बालिकाओं को 14 वर्ष की आयु तक अनिवार्य बाल शिक्षा दिलवाने के हिमायती थे.
आजादी के आरम्भिक वर्षो में ही तकनिकी और महिला शिक्षा पर जोर देने वाले अबुल कलाम के ही कार्यकाल में 1956 में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन की स्थापना की गई थी. शिक्षा को केंद्र तथा राज्य दोनों स्तरों से फलीभूत करने के लिए इन्होने केन्द्रीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष रहते हुए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी का गठन इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य था. ऐसे महान शिक्षाविद मौलाना अबुल कलाम आजाद का निधन 22 फरवरी, 1958 के दिन हुआ था. शिक्षा के क्षेत्र में इनके विस्मरणीय योगदान के लिए इन्हें मरणोपरांत भारतरत्न से विभूषित किया गया तथा 2008 से इनके जन्म दिवस को National Education Day(राष्ट्रीय शिक्षा दिवस) के रूप में मनाया जाता है.....
